जिरह पढ़ें, आप अपनी लिपि में (Read JIRAH in your own script)

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जिरह करने की कोई उम्र नहीं होती। पर यह सच है कि जिरह करने से पैदा हुई बातों की उम्र बेहद लंबी होती है। इसलिए इस ब्लॉग पर आपका स्वागत है। आइए,शुरू करें जिरह।
'जिरह' की किसी पोस्ट पर कमेंट करने के लिए यहां रोमन में लिखें अपनी बात। स्पेसबार दबाते ही वह देवनागरी लिपि में तब्दील होती दिखेगी।

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Wednesday, August 13, 2008

बहुत दिनों बाद

किसी कविता को सुनाने या पढ़ाने से पहले उसके बारे में अगर कवि को अपनी ओर से कुछ कहने की जरूरत पड़े तो यह उस कविता का कमजोर पक्ष हो सकता है। जाहिर है इस कविता के बारे में मैं अपनी ओर से कुछ कहना नहीं चाहता। पर यह भरोसा है कि पाठकों की ओर से भी इस पर कई नई बातें आ सकती हैं। कुछ ऐसी बातें जिन पर संभवतः मेरी निगाह भी नहीं गई है। फिलहाल पेश है कविता 'बहुत दिनों बाद' :