जिरह पढ़ें, आप अपनी लिपि में (Read JIRAH in your own script)

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जिरह करने की कोई उम्र नहीं होती। पर यह सच है कि जिरह करने से पैदा हुई बातों की उम्र बेहद लंबी होती है। इसलिए इस ब्लॉग पर आपका स्वागत है। आइए,शुरू करें जिरह।
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Monday, September 22, 2008

जिंदगी मांगती रही है हिसाब

उम्र के
इसी पड़ाव पर
जिंदगी पूछने लगी मुझसे,
सच-सच बता
मुझे आखिर तूने कितना जिया

जिंदगी जब
मांगने लगे,
हर किये-धरे का
ऐसे हिसाब
मै जानता हूं
सुख गुम होता है
दुख तो खैर बेहिसाब

अब
तू तो ये न पूछ मुझसे
कि दिल्ली आकर क्या किया
सचमुच यारो,
जीने की आदत छूट गई,
मरने का सलीका सीख लिया।