और
नेता से दलाल
होने का अहसास
जब पसरा हो
अपने आसपास
तो कहने की ज़रूरत नहीं
कि अंधेरा गहरा है
और
चुनौतियां ज़्यादा
इसलिए
अब बेहद जरूरी है
कि मूकदर्शक की भूमिका से
हम उबरें
और नये साल के सूरज के साथ
संघर्ष बन उभरें
पेशकश :
अनुराग अन्वेषी
at
2:23 AM
5
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Labels: नया साल, नववर्ष, न्यू ईयर, हैपी न्यू ईयर