जिरह पढ़ें, आप अपनी लिपि में (Read JIRAH in your own script)

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जिरह करने की कोई उम्र नहीं होती। पर यह सच है कि जिरह करने से पैदा हुई बातों की उम्र बेहद लंबी होती है। इसलिए इस ब्लॉग पर आपका स्वागत है। आइए,शुरू करें जिरह।
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Sunday, August 10, 2008

ब्लॉग बाइट : गोद में हिंदी, शहर में ढिंढोरा

मेरे साथियो,
हिंदी के यूनिकोडेड फॉन्ट की चर्चा मैंने इससे पहले के किसी ब्लॉग बाइट में की थी। इस बार कई साथियों के मेल मुझे मिले। उन्होंने जानना चाहा था कि ट्रांस्लिटरेशन टूल के बिना हिंदी में कंपोजिंग कैसे हो सकती है। इस अंक में मैंने विंडोज एक्सपी की इसी खासियत की चर्चा की है। बताया है कि एक्सपी में हिंदी के यूनिकोडेड फॉन्ट की सुविधा दी गई है। उसे एक्टिव कैसे किया जाये, यह जानना चाहें तो ब्लॉग बाइट की नई कड़ी पढ़ें। नवभारत टाइम्स में छपी इस ताज़ा किस्त के लिए यहां क्लिक करें। अगर आप इनस्क्रिप्ट के की-बोर्ड के बारे में जानना चाहते हैं तो मुझे लिखें। मैं इनस्क्रिप्ट की-बोर्ड का लेआउट मेल कर दूंगा।

4 comments:

विद्यासागर महथा said...

अच्छी जानकारी मिली। एक्टीवेट करके देखता हूं।

Udan Tashtari said...

सही जानकारी है.

अनुराग said...

shukriya jaankari ke liye....

रंजना [रंजू भाटिया] said...

कोशिश करी पर हुआ नही :(