मीत भाई की नकल कर खुशी हुई। मैंने दूसरों का इस तरह का ब्लॉग नहीं देखा है। मीत की नकल कर ही कोशिश की एक पोस्ट करने की। अविनाश से रास्ता पूछा। उसने तरीका बताया। और एक नई पोस्ट इस तरह। इन दोनों का आभार।
Tuesday, August 5, 2008
अपने मीत की नकल
पेशकश :
अनुराग अन्वेषी
at
5:19 PM
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
6 comments:
अरे वाह ! आपकी आवाज़ जँच रही है । नया अन्दाज़ है यह कमेंटरी और गीत की मिक्सिंग । अब हम भी आते हैं इस राह पर जल्द ही !
बहुत अच्छा प्रयोग शुरुआत बहुत सुंदर की है आपने ...आवाज़ बहुत अच्छी है आपकी ..गाना भी बेहद सुंदर है :)
जितना आनन्द गीत में आया, उतना ही कमेंट्री में भी! देखिये, अब इस सिरीज़ को चालू रखना है, कम से कम एक-दो गीत ऐसी ही भावपूर्ण कमेंट्री के साथ सुनवाइये
ये रही मेरी फर्माइशें
1. हो के मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा...
2. जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहां हैं
सबसे पहले धन्यवाद। एक खूबसूरत गीत के लिये,दूसरे बहुत-बहुत बधाई एक रोबदार, प्रभावशाली आवाज़ के धनी है आप...:)
लगे रहिये ....हजूर.....
बहुत बधाई. जबरदस्त रहा यह पोडकास्ट. भविष्य मे और उम्मीद है सुनने की.
Post a Comment