जिरह पढ़ें, आप अपनी लिपि में (Read JIRAH in your own script)

Hindi Roman(Eng) Gujarati Bangla Oriya Gurmukhi Telugu Tamil Kannada Malayalam

 
जिरह करने की कोई उम्र नहीं होती। पर यह सच है कि जिरह करने से पैदा हुई बातों की उम्र बेहद लंबी होती है। इसलिए इस ब्लॉग पर आपका स्वागत है। आइए,शुरू करें जिरह।
'जिरह' की किसी पोस्ट पर कमेंट करने के लिए यहां रोमन में लिखें अपनी बात। स्पेसबार दबाते ही वह देवनागरी लिपि में तब्दील होती दिखेगी।

Tuesday, June 30, 2009

दफ्तर में करने को कुछ नहीं, ये है न !

IF GLOBAL FINANCIAL CRISIS HITS YOUR COMPANY AND IF YOU HAVE NOTHING TO DO IN YOUR OFFICE, PLEASE TRY THIS LINK!

CLICK HERE

3 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

अपुन को इस काम के लिए फुरसत नहीं। वैसे शौक से एक दिन हाथ आजमा चुके हैं। कोशिश करें तो इस काम में भी अव्वल आ सकते हैं।

नदीम अख़्तर said...

बहुत ही अच्छा लगा ये खेल, मेरी एक्यूरेसी ज़रा ठीक नहीं थी। मैंने दो बार मक्खियां मारीं और मुझे एक बार 23 फीसद और दूसरी बार 30 फीसद अचूक होने का तमगा मिला।

श्याम कोरी 'उदय' said...

... टाईमपास .... बहुत खूब !!!