जिरह पढ़ें, आप अपनी लिपि में (Read JIRAH in your own script)

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जिरह करने की कोई उम्र नहीं होती। पर यह सच है कि जिरह करने से पैदा हुई बातों की उम्र बेहद लंबी होती है। इसलिए इस ब्लॉग पर आपका स्वागत है। आइए,शुरू करें जिरह।
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Tuesday, June 2, 2009

सात सुरों की धुन (पापा का ब्लॉग)

साथियो, आज से मेरे पापा ने भी ब्लॉगिंग शुरू कर दी। ब्लॉग का नाम रखा है सात सुरों की धुन। उनका इरादा है कि इस ब्लॉग पर वह अपनी कविता, गीत और गजल पोस्ट किया करेंगे। लेख, कहानी, आलोचना या समीक्षा के लिए एक दूसरा ब्लॉग वह तैयार कर रहे हैं। उसका नाम दिया है उन्होंने - जो अनकहा रहा।
तो फिर आप देखें उनका पहला ब्लॉग - सात सुरों की धुन

3 comments:

नीरज गोस्वामी said...

ब्लॉग जगत में स्वागत है कविता के माध्यम से आशा जगाते एक ब्लॉग का...
नीरज

आदर्श राठौर said...

बधाई

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत अच्छा कार्य किया है यह आपने अनुराग शुक्रिया