जिरह पढ़ें, आप अपनी लिपि में (Read JIRAH in your own script)

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जिरह करने की कोई उम्र नहीं होती। पर यह सच है कि जिरह करने से पैदा हुई बातों की उम्र बेहद लंबी होती है। इसलिए इस ब्लॉग पर आपका स्वागत है। आइए,शुरू करें जिरह।
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Thursday, March 18, 2010

खुशियां हैं बरकरार

सुबह 5 बजे सोने गया और अब 10:30 बजे सो कर उठा हूं। कोई शोरगुल नहीं। खूब गहरी नींद आई। सोकर उठा तो मोबाइल में 18 मिस्ड कॉल दिखी। चार बार मेमसाब (मेरी श्रीमती जी) ने फोन किया था। बाकि 14 साथी-संगतियों की कॉल थी। सोचा था इन सात दिनों में पुराने बचे कई काम निबटा लूंगा। कुछ लेख लिखने थे, जिनके तगादे काफी तेज हो गए हैं। बातें जेहन में हैं पर मन आसमां में उड़ रहा है। कैसे लिखूं? लिखने की इच्छा नहीं हो रही। बस इन दिनों वही कर रहा हूं जो इच्छा होती है। लेख लिखने की इच्छा नहीं है तो लिखूंगा भी नहीं। बाकी दिनों में तो यह सोच कर कर लिया करता था कि चलो करियर के रास्ते में कहीं ये चीजें सपोर्टिव होती हैं। पर इन दिनों जब सोचता हूं करियर की बात तो मन से फूटती है आवाज - यार काहे को लफड़ा मोल ले रहा है। चल मस्ती कर। बस फिर क्या? हंसी-ठिठोली। कभी टीवी पर खबरें देख लीं तो कभी चैनल बदल-बदल कर फिल्में। ज्यादा इच्छा हुई तो मनपसंद सीडी निकाली, गाने सुन लिए या फिल्म देख ली।

2 comments:

anupam mishra said...

ओह तो सर पत्नि विरहा में दिन गुजार रहे हैं। अच्छा मौका है बंदिशों को तोड़कर बिंदास हो जाने का।

Maria Mcclain said...

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