सुबह 5 बजे सोने गया और अब 10:30 बजे सो कर उठा हूं। कोई शोरगुल नहीं। खूब गहरी नींद आई। सोकर उठा तो मोबाइल में 18 मिस्ड कॉल दिखी। चार बार मेमसाब (मेरी श्रीमती जी) ने फोन किया था। बाकि 14 साथी-संगतियों की कॉल थी। सोचा था इन सात दिनों में पुराने बचे कई काम निबटा लूंगा। कुछ लेख लिखने थे, जिनके तगादे काफी तेज हो गए हैं। बातें जेहन में हैं पर मन आसमां में उड़ रहा है। कैसे लिखूं? लिखने की इच्छा नहीं हो रही। बस इन दिनों वही कर रहा हूं जो इच्छा होती है। लेख लिखने की इच्छा नहीं है तो लिखूंगा भी नहीं। बाकी दिनों में तो यह सोच कर कर लिया करता था कि चलो करियर के रास्ते में कहीं ये चीजें सपोर्टिव होती हैं। पर इन दिनों जब सोचता हूं करियर की बात तो मन से फूटती है आवाज - यार काहे को लफड़ा मोल ले रहा है। चल मस्ती कर। बस फिर क्या? हंसी-ठिठोली। कभी टीवी पर खबरें देख लीं तो कभी चैनल बदल-बदल कर फिल्में। ज्यादा इच्छा हुई तो मनपसंद सीडी निकाली, गाने सुन लिए या फिल्म देख ली।
विवाह में आर्थिक समता
1 day ago







2 प्रतिक्रियाएं:
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